सावन गीत
सावन में मेरा मन मचला
मधुर मधुर चली बयार
रिम झिम वर्षा की फुहार
हरी हरी छाई हरियाली
लता नहाई नदियाँ उछली
कभी बादल कभी धूप सुनहरी
मस्त पवन के झोंको संग
मेरा आँचल उड़ चला
पात पात में यौवन छाया
बगिया में भंवरा बौराया
सोंधी सी माटी की खुश्बू
ठंडी हवा ने मन भरमाया
कैसे रोकूँ इस मनुवा को
बात बात में ये मचला
झुकी झुकी पेड़ों की डाली
बगिया गाये कोयल काली
मेघा जब रिम झिम बन आये
राग मल्हार मनुवां गाये
सावन की पुरवय्या ने
मन वीणा के तार बजाये
पिया मिलन को दिल मचला
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