बुधवार, 17 जुलाई 2013

हाय रे महंगाई


जय हो तेरी देवी महंगाई, तू सबके होश ठिकाने लाई
करता मै तेरा गुणगान, है कौन तुझसे अधिक महान,
महिमा तेरी बड़ी निराली , आती आगे जब कभी थाली,
बस होती रोटी दो-चार , सदा जीवन ऊँच-विचार,

तू सबको यह सिखलाती है, सबको सन्मार्ग पर लती है,
प्याज के बदले काटे आलू ,फिर भी नैन बहाती नीर,
तेरी हवा से इन मूर्खों को ,होती देवी अतिशय पीड,
ये क्या जाने तेरा दम , तू करती जनसंख्या कम,

सब्जी-सी नाचीज को भी , तू दिलवाई अधिक सम्मान,
तेरे कारण लाल टमाटर , पाए माणिक-सा मान,
है नेताओं की तू हथियार , थर्राती है तुझसे सरकार ,
निर्धनों को तू उपवास कराती , और सिखाती है हठयोग,
तेरी महिमा कितनी न्यारी , क्या जाने ये मूरख लोग

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