उत्तरायणी मेला बागेश्वर:-
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देवभूमि उत्तराखण्ड में उत्तरायणी मेले का धार्मिक
व्यापारिक और सांस्कृतिक महत्व है। उत्तराखण्ड के
प्रयाग कहे जाने वाले बागेश्वर में सरयू नदी के तट पर
लगने वाला यह मेला मकर संक्रांति से आरंभ होकर लगभग
हफ्ते भर चलता है। यह व्यापारिक मंडी के रूप में भी
जाना जाता है जिसमें धार्मिक से लेकर सांस्कृतिक
कार्यों से जुड़े और राजनीतिक लोग भी शिरकत करते
हैंशैलराज हिमालय की सुरम्य क्रीड़ांगना
में विशालकाय नीलेश्वर व भीलेश्वर की पर्वत कंदराओं
के मध्य सूर्यकुंड से अग्निकुंड तक विस्तार लिये हुए
कटोरानुमा ऐतिहासिक नगरी बागेश्वर माद्घ मास
की पहली तिथि से अपार जनसमूह वाले
उत्तरायणी मेले का रूप ले लेती है।
आयोजन की दृष्टि से सूर्य के उत्तरी अमन में प्रवेश के
पहले दिन उत्तरायण माद्घ मास की पहली तिथि से
पांच दिनों तक मेला लगता है। परंतु पवित्रतम माद्घ
मास भर यहां स्नान पर्व आयोजित होते रहते हैं।
सरयू, गोमती और विलुप्त जलधारा सरस्वती के
त्रिवणी संगम के कारण बागेश्वर को उत्तराखण्ड
का प्रयाग भी कहा जाता है। बागेश्वर नगर समुद्र सतह
से 760 मीटर की सतही ऊंचाई पर स्थित है और
प्राचीनकाल से ही
ऐतिहासिकता, धार्मिकता और सांस्कृतिक वैभव के
लिये प्रसिद्ध रहा है।
बागेश्वर को मार्कण्डेय
मुनि की तपोभूमि भी कहा जाता है।
शनिवार, 5 जुलाई 2014
उत्तरायणी मेला बागेश्वर
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