कौन कहता है ?
कौन कहता है कि,
पहाडो में चड़ना मुश्किल है
पर्वतों को लाघना और ..
लांघ कर वापस आना मुश्किल है !
मेरे यहाँ का आदमी तो
अपने आप तो, रहा ..रहा
वो तो .....
अपनी पीठ पर आदमी को लाद कर
एक नहीं, दो नहीं कई मील
रोज चडता है और उतरता है
बिना बिसोंण ( भार को उत्तर कर कुछ पल आराम करके ) के !
मेरे पहाड पर आई आपदा के पल में
जहां सडके टुट गई, पुल बह गए
गाऊं के वो सारे रस्ते बह गए
तब .......
उन तक , उन पहाडो पर
ना तो , नेता गए , ना बिध्याक ना मंत्री
वो सब .....
अपने घरो से , अपने अपने पार्टी दफ्तरों से
अपना दुःख दर्द और घ्डियाले आंसू बहते रहे
बाद में ....
जो हैलीकैपटरो में चहड्कर
आते जाते है !
और अपन्रे को फाड और पहडियुन का
हमदर्द बताते रहे !
कौन कहता है कि पहाड़ो में
चड़ना मुश्किल है
देखो ना मै अभी अभी वह से लौटा हूँ
कौन कहता है कि ....
पहाडो में चड़ना मुश्किल है ... ?????
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